આનંદ

आनंद

आनंद से … जागो
आनंद से … चाय पीओ
आनंद से … नास्ता करो
आनंद से … स्नान करो
आनंद से … पैसा कमाओ
आनंद से … पैसा खर्च करो
आनंद से … पैसा बचाओ
आनंद से … पढो
आनंद से … देखो
आनंद से … सुनो
आनंद से … लिखो
आनंद से … काम करो
हर एक काम आनंद से … करो ।
मौत भी आ जाय तो आनंद से … स्वीकार करो ।

अरे , दोस्तो …. मैं कोई कथा करके आपको व्यथा पहुंचाना नहि चाहता ।

टीवी पर मेरी मां (83) कई कथाकारो की कथा सुन कर अपना समय व्यतित करती है।

उस समय मेरे कानो पर आते हुए एसे विधान मेरे मन मे सवाल पैदा करते है ……

यह आनंद होता क्या है ?
यह आनंद होता कैसा है ?
यह आनंद मिलता कहां है ?
यह आनंद आता कहांसे है ?
यह आनंद ठहरता कहां है ?
यह आनंद रूकता क्यो नहि ?
यह आनंद को पहचाने कैसे ?

मौज से जीओ और आनंद करो ।
तो
मौज और आनंद के बीचमे क्या अंतर है ?

मुझे लगाता है …

शरीर एवं ईन्द्रियांकी खुशी “मौज” है
और
मन एवं आत्माकी खुशी “आनंद” है ।

इसीलिये कहा जाता है ..

मन लगा कर तन कोई भी काम करे तो मिलने वाले परिणाममे आनंद जरूर होता है ।

क्या सोच है आपकी ?
( लाइक ना करे । आनंद से कुछ भी लिख दिजीये …. मुझे बेहद आनंद होगा । )

आपका अपना अखिल

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About અખિલ સુતરીઆ

મારા વિશે મારે કંઇક કહેવાનું હોય તો, .... થોડુ વિચારવું પડે. મને મારી ઓળખ કરાવે .... એવા એક જ્ણની તલાશમાં છું.
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