मुश्किल है ।

अनजान लोग
आते है जीवनमे
संबंध बनाते है

उनके साथ
जान पहचान
बढती है या बढाते है

खुशीयो के साथ
उत्सव मनाते है और
घरोबा बनाते है

संबंधोको निभाना
कठीन है या आसान
कहना बहुत मुश्किल है

संबंध जब तूटते है
जीम्मेदार कौन .. क्या होता है
कहना बहुत मुश्किल है

संबंधो की
दूरीयाँ और नजदिकीयाँ
बनाये रखना बहुत मुश्किल है

कभी कभी या ज्यादातर
जानकर भी लोग क्युं अनजान बन जाते है
कहना बहुत मुश्किल है

कहने को तो
सब कुछ आसान है
लेकिन करना बहुत मुश्किल है

Advertisements

About અખિલ સુતરીઆ

મારા વિશે મારે કંઇક કહેવાનું હોય તો, .... થોડુ વિચારવું પડે. મને મારી ઓળખ કરાવે .... એવા એક જ્ણની તલાશમાં છું.
This entry was posted in રોજનીશી ૨૦૦૯. Bookmark the permalink.