अच्छा लगता है

सुबह की खुशनुमा हवामे
गहरी सांस लेते और छोडते हुए

गलेमे मोबाइल लटकाते हुए
खास प्रार्थनाए सुनते हुए

१. प्रणम्य शिरसा देवं
२. इतनी शक्ति हमे देना
३. सूरज की गरमी से
४. हमको मन की शक्ति देना
५. वैष्णवजन तो तेने कहीए

सुबहकी चाय के लिये दूध ( 1 गोल्ड + 1 शक्ति ) लाते हुए

सडक पर दाहिनी ओर चलते हुए
शरीर के रक्तभ्रमणके बदलावको
महसुस करते हुए

नये दिनका प्रारंभ
अच्छा लगता है

Advertisements

About અખિલ સુતરીઆ

મારા વિશે મારે કંઇક કહેવાનું હોય તો, .... થોડુ વિચારવું પડે. મને મારી ઓળખ કરાવે .... એવા એક જ્ણની તલાશમાં છું.
This entry was posted in રોજનીશી ૨૦૦૯. Bookmark the permalink.